Thursday, November 1, 2007

थोडी सी कविताएँ-11


उड़ान
जूझती है अँधेरे से
खोजती सवेर को
एक उड़ान
क्षितिज कर पार
लहूलुहान
जब करती आकाश लाल
तो जागता सूरज
काफी है
भरने के लिए आकाश
एक उड़ान

3 comments:

आशीष said...

एक आशावादी कविता पढाने के लिए धन्यवाद

sarbjot said...

Flight towards one's hopes and aspirations....anyone can start visualize one's 'Udaan of thoughts'where sky is the limit.
A lesson of optimistic living.

Umesh Bawa said...

उड़ान के संधर्ब में शब्दों की कमी का आभास ही नही होता. मनो पूरी सृष्टि उन चाँद शब्दों में समा गयी है..और अपने सर्वस्व कुर्बान होने की कहानी बयान कर रही है...