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Saturday, November 3, 2007

Urban Monologue (एक शहर का आलाप)


एक
लंबे अरसे से केदारनाथ सिंह की कविताओं से जुड़ा ' हुआ हूँ।विशेषकर 'बाघ' श्रृंखला की इक्कीस कविताएं बहुत ही कमाल की लगती हैं. कुछ समय पहले मेरे एक मित्र-फोटोग्राफेर गौरव बजाज ने कुछ तस्वीरें खींच कर भेजीं। उन्ही के साथ बाघ का चौथा भाग जोड़ कर कुछ नया करने की छोटी सी कोशिश की है। पेश है इस मोन्टाज में ।